लकवे को मात देकर भाविनाबेन बनीं चैंपियन: एक साल की उम्र में हुआ लकवा; कंप्यूटर सीखने गईं तो टेबल टेनिस खेलने का मिला मौका, अब पैरालिंपिक्स में मेडल तय
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गुजरात11 मिनट पहलेलेखक: राजकिशोर
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गुजरात की भाविनाबेन पटेल टेबल टेनिस के विमेंस सिंगल्स में क्लास-4 कैटेगरी के फाइनल में पहुंच गईं, इसी के साथ उन्होंने टोक्यो में पैरालिंपिक्स में देश के लिए पहला मेडल पक्का कर लिया है। वे टेबल टेनिस में मेडल जीतने वाली देश की पहली पैरा खिलाड़ी हैं। भाविनाबेन पटेल जब एक साल की उम्र की थीं, तो चलने की कोशिश में गिर गईं, उस समय उनके एक पैर में लकवा हो गया, बाद में उनका दूसरा पैर भी लकवे से बेकार हो गया।
भाविनाबेन तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी
भाविनाबेन पटेल गुजरात के वडनगर के सुंडिया गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता हंसमुख भाई पटेल गांव में ही छोटी सी दुकान चलाते हैं। भाविनाबेन तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। पिता ने भास्कर को बताया कि भाविनाबेन पटेल का एक भाई और एक बहन है, दोनों स्वस्थ हैं। भाविनाबेन जब एक साल की थीं, तो चलने के प्रयास में गिर गईं और उन्हें एक पैर में लकवा हुआ। बाद में दोनों पैर में लकवा हो गया। ऑपरेशन होने के बाद उसने बैसाखी के सहारे चलना शुरू किया।
कंप्यूटर सीखने के दौरान कोच की नजर पड़ी
हंसमुख भाई बताते हैं कि भाविनाबेन संस्कृत में ग्रेजुएट हैं। जब वे दिव्यांगों के स्कूल में कंप्यूटर सीखने जाने लगीं, उसी दौरान गुजरात पैरा टेबल टेनिस के कोच की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने ही भाविनाबेन को टेबल टेनिस खेलने के लिए प्रेरित किया। एक बार व्हीलचेयर टेबल टेनिस प्रतियोगिता में जीतने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अब तक टेबल टेनिस की वजह से वे 27 देशों का दौरा कर चुकी हैं। वे कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश के लिए मेडल जीत चुकी हैं।
शादी के बाद पति का मिला पूरा साथ
उन्होंने बताया कि भाविनाबेन को स्पोर्ट्स कोटे से कर्मचारी बीमा निगम में नौकरी मिली है। तीन साल पहले उनकी शादी हुई है। शादी के बाद पति का पूरा साथ उन्हें मिला। पति और ससुराल वालों के सपोर्ट मिलने की वजह से ही वे शादी के बाद भी खेल जारी रख सकीं। यही नहीं शादी के बाद उनके पति हर प्रतियोगिता में साथ जाते हैं, ताकि भाविनाबेन को किसी तरह की कोई परेशानी का सामना न करना पड़े। टोक्यो में भी वे साथ हैं।
भाविनाबेन पटेल ने इससे पहले प्री क्वार्टर फाइनल में ब्राजील की जॉयज डि ओलिवियरा को 12-10, 13-11, 11-6 से मात दी थी।
गोल्ड मेडल जीतने का है भरोसा
पिता कहते हैं कि भाविनाबेन से मेडल जीतने का भरोसा उन्हें पहले से ही था, वे अब तक जहां भी गई हैं, बिना मेडल लिए नहीं लौटी हैं। उन्हें पूरा विश्वास है कि टोक्यो से भाविनाबेन गोल्ड मेडल जीतकर ही लौटेंगी।
टोक्यो में पहली बार टेबल टेनिस में व्हीलचेयर में मिल रहे हैं चार मेडल
टोक्यो में पहली बार टेबल टेनिस में व्हीलचेयर में सेमीफाइनल में पहुंचने वाले खिलाड़ी को भी मेडल मिल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय पैरालिंपिक समिति (आईपीसी) की संचालन समिति ने 2017 में अंतरराष्ट्रीय टेबल टेनिस महासंघ के उस अनुरोध को स्वीकार कर लिया था जिसमें सभी पदक स्पर्धाओं में तीसरे स्थान के प्ले-ऑफ को हटाने और हारने वाले दोनों सेमीफाइनलिस्ट को कांस्य पदक देने की मांग की गई थी।
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